In बस यूँ ही...चलते-चलते..., बेतरतीब पन्ने

कुछ किस्से अफ़साने नहीं होते

In बेतरतीब पन्ने,

कलाम-ए-मोहब्बत बना महफ़िल

In Depression, बस यूँ ही...चलते-चलते...

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी...परेशान हूँ...

In बस यूँ ही...चलते-चलते..., बेतरतीब पन्ने

चलो...अंधेरों से रोशनी ढूँढ लाते हैं...

In अयांश, बस यूँ ही...चलते-चलते...

चन्दा भी तू...और सूरज भी तू...